

🚨 सहारनपुर बाजोरिया रोड पर नियमों की धज्जियां! अवैध तरीके से क्लीनिक संचालन का आरोप, विकास प्राधिकरण से तत्काल सीलिंग की मांग — जे.ई. शोयब आलम और मैट लाल बहादुर की भूमिका पर गहराते सवाल 🚨
सहारनपुर — शहर के प्रमुख बाजोरिया रोड स्थित जोन-1 क्षेत्र में एक क्लीनिक को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विकास प्राधिकरण में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, डॉक्टर शशीकांत सैनी वाली गली के कोने पर कई महीनों से बंद पड़ी एक दुकान को किराए पर देकर कथित रूप से डॉ. जय मुहाल के नाम से क्लीनिक खोला जा रहा है, जो वर्तमान भवन उपविधियों का खुला उल्लंघन बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नवीन भवन उपविधि के अनुसार किसी भी क्लीनिक के संचालन के लिए न्यूनतम 100 वर्गगज क्षेत्रफल में निर्मित भवन अनिवार्य होता है, जबकि जिस दुकान में क्लीनिक खोला जा रहा है वह इस मानक पर बिल्कुल भी खरा नहीं उतरती।
इस मामले को लेकर विकास प्राधिकरण में व्यावसायिक भवन/दुकान के आवंटन से संबंधित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसकी संदर्भ संख्या 40013226001596 है। यह शिकायत ऑनलाइन माध्यम से दर्ज होकर सचिव, सहारनपुर विकास प्राधिकरण तक पहुंच चुकी है। शिकायत में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि नियमों के विरुद्ध संचालित किए जा रहे इस कथित क्लीनिक को तत्काल प्रभाव से सील किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके।
स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। लोगों का कहना है कि जोन-1 जैसे संवेदनशील और घनी आबादी वाले क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर क्लीनिक खोलना न सिर्फ अवैध है, बल्कि इससे आम जनता की सुरक्षा और सुविधा पर भी असर पड़ सकता है। क्षेत्र में यातायात पहले ही दबाव में रहता है और यदि बिना मानक के चिकित्सा गतिविधियां शुरू होती हैं तो आपातकालीन स्थितियों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
👉 भूमिका पर सवाल
शिकायत सामने आने के बाद यह चर्चा भी जोरों पर है कि क्षेत्रीय निरीक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी से जुड़े जे.ई. शोयब आलम और कथित रूप से प्रक्रिया में शामिल बताए जा रहे मैट लाल बहादुर की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि इन दोनों अधिकारियों के संबंध में अभी तक किसी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि या विभागीय बयान सामने नहीं आया है, लेकिन शिकायतकर्ता और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते निरीक्षण होता, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि छोटी दुकानों या गैर-मानक भवनों में इस तरह क्लीनिक संचालित होने लगे, तो यह न केवल भवन उपयोग नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आसपास के निवासियों के लिए स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़े खतरे भी बढ़ा सकता है। इसी कारण स्थानीय नागरिकों ने विकास प्राधिकरण से मांग की है कि मौके का निष्पक्ष भौतिक निरीक्षण कराया जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो बिना किसी दबाव के सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल संबंधित क्लीनिक संचालक या विकास प्राधिकरण की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन शिकायत दर्ज होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल जरूर मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सहारनपुर विकास प्राधिकरण इस मामले में नियमों के अनुसार कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
📜 क्या कहते हैं विकास प्राधिकरण के नियम?
शिकायत में जिन नियमों का हवाला दिया गया है, वे broadly निम्न प्रकार के हैं —
भवन उपविधि (Building Bye-Laws) के अनुसार किसी भी आवासीय या छोटे व्यावसायिक ढांचे में चिकित्सा गतिविधि (जैसे क्लीनिक) संचालित करने के लिए न्यूनतम निर्धारित भू-क्षेत्र और संरचनात्मक मानक आवश्यक होते हैं।
कई नगर विकास प्राधिकरणों की तरह सहारनपुर में भी चिकित्सीय उपयोग (Medical Use) को सामान्य दुकान उपयोग (Shop Use) से अलग श्रेणी में माना जाता है। इसके लिए लेआउट स्वीकृति, मानचित्र पास, पार्किंग व्यवस्था, वेंटिलेशन, वेटिंग एरिया और आपात निकास (Emergency Exit) जैसी शर्तें लागू होती हैं।
यदि भवन का मूल स्वीकृत उपयोग “दुकान” है, तो उसे बिना Change of Land Use (CLU) / Change of Building Use स्वीकृति के क्लीनिक में परिवर्तित करना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
100 वर्गगज (या स्थानीय उपविधि अनुसार निर्धारित क्षेत्रफल) से कम क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा चलाने पर फायर सेफ्टी, भीड़ नियंत्रण और स्वास्थ्य मानकों पर प्रश्न खड़े होते हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित स्थल इन मानकों को पूरा नहीं करता, फिर भी वहां चिकित्सा गतिविधि शुरू की जा रही है।
🏢 शिकायत का आधिकारिक पक्ष
यह मामला विकास प्राधिकरण में व्यावसायिक भवन/दुकान से संबंधित शिकायत श्रेणी में दर्ज है, जिसकी संदर्भ संख्या 40013226001596 बताई गई है। शिकायत ऑनलाइन माध्यम से अग्रसारित होकर सचिव, सहारनपुर विकास प्राधिकरण के संज्ञान में पहुंच चुकी है। मांग की गई है कि मौके का निरीक्षण कर नियमों के विपरीत पाए जाने पर क्लीनिक को सील किया जाए।
⚖️ कानूनी परिणाम क्या हो सकते हैं?
यदि जांच में यह पाया जाता है कि भवन का उपयोग स्वीकृत मानचित्र और भू-उपयोग के विपरीत हो रहा है, तो विकास प्राधिकरण को नोटिस जारी करने, जुर्माना लगाने, सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तक का अधिकार होता है। बिना अनुमति उपयोग परिवर्तन पर प्राधिकरण अधिनियम के तहत कार्रवाई संभव है।
👀 अधिकारियों की भूमिका पर चर्चा
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि क्षेत्रीय निरीक्षण से जुड़े जे.ई. शोयब आलम तथा कथित रूप से प्रक्रिया से जुड़े बताए जा रहे मैट लाल बहादुर की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि इन नामों के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह केवल शिकायत के आधार पर उठे सवाल हैं, जिनकी सच्चाई प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
🚦 स्थानीय लोगों की चिंता
नागरिकों का कहना है कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में बिना मानक क्लीनिक चलने से
यातायात दबाव
पार्किंग अव्यवस्था
आपातकालीन पहुंच में बाधा
स्वच्छता व जैव-चिकित्सीय कचरे (Bio-Medical Waste) के निस्तारण का खतरा
बढ़ सकता है।
अब सबकी नजर इस पर है कि सहारनपुर विकास प्राधिकरण नियमों के अनुरूप निष्पक्ष कार्रवाई करता है या नहीं। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया का भी इंतजार है।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ | ब्यूरो चीफ – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर
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